Chapter-6
राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य
उत्तर वैदिक काल :
वैसे तो राजा का चुनाव जनों डी द्वारा होता था परन्तु 3000 साल पहले राजा बनने की प्रक्रिया में बदलाव आया , अश्वमेघ यज्ञ या अन्य यज्ञों द्वारा लोग राजा के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
वर्ण व्यवश्था :
पुरोहितों ने लोगों को चार वर्ण में विभक्त किया था।
- ब्राम्हण : वेदों का अध्धयन और यज्ञ करना।
- क्षत्रिय : युद्ध करना तथा लोगों की रक्षा करना।
- विश या वैश्य : इनमे कृषक, पशुपालक और व्यापारी आते थे।
- शूद्र : अन्य वर्णों की सेवा करना।
नोट : क्षत्रिय और वैश्य दोनों को यज्ञ करने का अधिकार था परन्तु शूद्रों और महिलाओं को किसी भी प्रकार के अनुष्ठान करने का अधिकार नहीं थी। महिलाओं को भी शूद्र के सामने समझा जाता था।
नोट -2 : वर्ण का निर्धारण जन्म के अधिकार पर होता था।
नोट-3 : शिल्पकार, शिकारी तथा भोजन-संग्राहक इत्यादि वर्गों को अछूत माना जाता था।
नोट-4 : इस उपमहाद्वीप के पूर्वोत्तर क्षेत्र जैसे कई इलाकों में सामाजिक आर्थिक असमानता बहुत कम थी। यहाँ पुरोहितों का प्रभाव भी कम था।
जनपद :
- महायज्ञों को करने वाले राजा अब जन के राजा न होकर जनपदों के राजा माने जाने लगे।
- जनपद का शाब्दिक अर्थ जन के बसने के जगह होता है।
- दिल्ली में पुराना किला, उत्तर प्रदेश में मेरठ के पास हस्तिनापुर और एटा के पास अतरंजीखेड़ा इनमे प्रमुख है।
- ये लोग झोपड़ियों में रहते थे और मवेशियों तथा अन्य जानवरों को पालते थे।
- ये लोग चावल, गेहूं, धान, जौ , दाले , गन्ना ,तिल तथा सरसों जैसी फैसले उगाते थे।
- खुदाई में धूसर एवं कुछ लाल रंग के चित्रित-धूसर पात्र मिले है।
- इन बर्तनों पर चित्रकारी आमतौर पर सरल रेखाओं ज्यामितीय आकृतियों में है।
महाजनपद :
- करीब 2500 साल पहले , कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण हो गए इन्हे महाजनपद कहा जाने लगा।
- महाजनपदों की एक राजधानी होती थी।
- कई राजधानियों में किलेबंदी की गई थी, नियमित वेतन देकर पूरे साल तक सैनिक रखते थे।
कर :
- फसलों पर कर : उपज का 1/6 वां हिस्सा जिसे भाग कहा जाता था।
- कारीगरों पर कर : श्रम के रूप में राजा के लिए महीने में एक दिन काम करना पड़ता था।
- पशुपालक पर कर : पशुपालकों को जानवरों या उनके उत्पाद के रूप में कर देना पड़ता था।
- व्यापारियों को सामान खरीदने-बेचने पर भी कर देना पड़ता था।
- आखेटकों तथा संग्राहकों को जंगल से प्राप्त वस्तुएं देनी होती थी।
कृषि में परिवर्तन :
- दो बड़े परिवर्तन आए।
- हल के फाल अब लोहे के बनने लगे जिससे पैदावार में वृद्धि हुई।
- धान का रोपण होने लगा ( बीज की जगह छोटे पौधों का रोपण होने लगा )
मगध महाजनपद :
- गंगा और सोन जैसी नदियां मगध से होकर बहती थी।
- ये नदियां यातायात, जल वितरण तथा जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।
- मगध का एक हिस्सा जंगलों से भरा था। इन जंगलों में रहने वाले हाथियों को पकड़कर और उन्हें प्रशिक्षित कर सेना के काम में लगाया जाता था।
- ईसके अलावां इस क्षेत्र में लौह अयस्क की खदाने है। मजबूत औजार और हथियार बनाने के लिए ये बहुत उपयोगी थे।
- बिम्बिसार, अजातुसतरु एवं महापद्मनंद मगध महाजनपद के शक्तिशाली राजा हुए।
- बिहार में राजगृह ( आधुनिक राजगीर ) कई सालों तक मगध की राजधानी बनी रही बाद में पाटलिपुत्र ( आज का पटना ) को राजधानी बनाया गया।
- 2300 साल पहले मेसिडोनियो के राजा सिकंदर ने मगध की ओर कूच करना चाहा परन्तु सैनिकों के इंकार के कारण उसे व्यास नदी के किनारे से लौटना पड़ा।
वज्जि :
- राजधानी वैशाली ( बिहार )
- यहाँ एक अलग शासन व्यवस्था थी जिसे गण या संघ कहते थे।
- वज्जि संघ का यह वर्णन दीघ निकाय एक प्रसिद्ध बौद्ध ग्रन्थ से मिलता है।
- गण या संघ में कई शासक होते थे। कभी-कभी लोग एक साथ शासन करते थे, जिसमें से प्रत्येक व्यक्ति राजा कहलाता था।
- ये सभाओं में बात चीत , बहस और विवाद के जरिए योजना बनाते थे।
- स्त्रियां , दास तथा कम्माकर इन सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे।
- बुद्ध तथा महावीर दोनों ही गण या संघ से सम्बंधित थे।
- अजातसत्तु या अजातशत्रु ( मगध का राजा ) ने वज्जि संघ पर युद्ध करने हेतु अपने मंत्री वस्सकार को बुद्ध के पास सलाह के लिए भेजा था।
- कई शक्तिशाली राजा संघ को जितना चाहते थे परन्तु 1500 साल पहले तक संघ का राज चलता रहा और अंत में गुप्त शासकों ने इसे जीत कर अपने राज्य में मिला लिया।
यूनान और एथेंस :
- लगभग 2500 साल पहले एथेंस के लोगो ने एक शासन-व्यवस्था की स्थापना की, जिसे प्रजातंत्र या गणतंत्र कहते है।
- यह व्यवस्था लगभग 200 सालों तक चली। इसमें 30 साल से ऊपर के उन सभी पुरुषों को पूर्ण नागरिकता प्राप्त थी , जो दास नहीं थे।
- औरतों को नागरिक का दर्जा नहीं मिलता था।
- महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए साल भर में कम से कम 40 बार सभा बुलाई जाती थी।
- शासन के कई पदों पर नियुक्तियाँ लॉटरियों द्वारा की जाती थी।
- सभी नागरिकों को सेना और नवसेना में अपनी सेवाएं देनी होती थी।
कुछ महत्वपूर्ण तिथियाँ :
- नए शासक ( लगभग ३००० साल पहले )
- महाजनपद ( लगभग 2500 साल पहले )
- गण या संघ राज्यों का अंत ( लगभग 1500 साल पहले )
- सिकंदर का आक्रमण दीघ निकाय का लेखन ( लगभग 2300 साल पहले )
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