hi friends आप सब कैसे है। आशा करता हु की आप सब अच्छे होंगे। आज हम सब hindi में NCERT Class-6 ( Chapter-9) Notes and summary in Hindi me आगे पढ़ेंगे और एक अच्छे से notes तैयार करेंगे जो आने वाले आगामी किसी भी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में हेल्प करेगी।
chapter-9
खुशहाल गाँव और समृद्ध शहर
लोहे के औजार और खेती
- उपमहाद्वीप में लोहे का प्रयोग लगभग 3000 साल पहले शुरू हुआ।
- महापाषाण कब्रों में लोहे के औजार और हथियार बड़ी संख्या में मिले है।
जंगलों को साफ करने की कुल्हाड़ियाँ और जुताई के लिए हलों के प्रमाण करीब 2500 वर्ष पहले मिले है।
- सिंचाई -आज से 3000 से 2500 साल पहले की सिंचाई। इस समय सिंचाई के लिए नहरें, कुएँ , तालाब तथा कृत्रिम जलाशय बनाए गए।
गाँव में रहने वाले लोग -
- इस उपमहाद्वीप के दक्षिणी तथा उत्तरी हिस्से के अधिकांश गाँवो में तीन तरह के लोग रहते थे।
- वेल्लाला -तमिल क्षेत्र में बड़े भू-श्वामि।
- उड़वार -साधारण हलवाहे।
- कदैसियर -भूमिहीन मजदूर और दास।
- देश के उत्तरी हिस्से में गाँव का प्रधान व्यक्ति ग्राम-भोजक कहलाता था। यह पद अनुवांशिक था।
- ग्राम-भोजक प्रायः बड़े भू-श्वामि होते थे जो कर वसूलने के साथ-साथ न्यायाधीश का कभी-कभी पुलिस का भी काम करते थे।
- स्वतन्त्र छोटे कृषकों को गृहपति कहा जाता था , इसके अलावा दास और कर्मकार जिनके पास अपनी भूमि नहीं थी आते थे।
- अधिकांश गाँवों में लोहार, कुम्हार, बढ़ई तथा बुनकर जैसे कुछ शिल्पकार भी होते थे।
तमिल रचनाएं -
- तमिल की प्राचीनतम रचनाओं को संगम साहित्य कहते है।
- इनकी रचना करीब 2300 साल पहले की गई।
- इन्हे संगम इसलिए कहा जाता है क्योंकि मदुरै के कवियों के सम्मेलनों में इनका संकलन किया जाता था।
- नोट -जातक कथाओं का संकलन बौद्ध भिच्छुओं ने किया था।
बेरिगाजा (भरुच का यूनानी नाम जो की वर्तमान गुजरात में पड़ता है )-
- आयात -बेरीगाजा में शराब , ताँबा , टिन , सीसा , मूंगा , पुखराज , कपडे , सोने और चाँदी के सिक्को का आयात होता था।
- निर्यात- हिमालय की जड़ी-बूटियाँ हाथी-दाँत , गोमेद, कार्निनियाँ , सूती कपड़ा,रेशम तथा इत्र यहाँ से निर्यात किए जाते थे।
आहत सिक्के -
- चाँदी या सोने के सिक्कों पर वभिन्न आकृतियों को आहत कर बनाए जाने के कारण इन्हे आहत सिक्का कहा जाता था।
मथुरा नगर -
- लगभग 2000 साल पहले मथुरा कुषाणों की दूसरी राजधानी बनी।
- यह यातायात और व्यापार के दो मुख्य रास्तों पर स्थित था।
- पहला रास्ता उत्तर-पश्चिम से पूरब की ओर ( तक्षशिला की ओर से आने वाला )
- दूसरा रास्ता उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाला था।
- शहर के चारो ओर किले बंदी थी, इसमें अनेक मंदिर थे।
- आस-पास के किसान तथा पशुपालक शहर में रहने वालों के लिए भोजन जुटाते थे।
- मथुरा बेहतरीन मूर्तियाँ बनाने का केंद्र था
- मथुरा एक धार्मिक केंद्र भी रहा है। यहाँ बौद्ध बिहार और जैन मंदिर है। यह कृष्ण भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
- मथुरा में प्रस्तर-खण्डों तथा मूर्तियों पर अनेक अभिलेख मिले है जो संक्षिप्त है तथा स्त्रियों तथा पुरुषों द्वारा मठों या मंदिरो को दान दिए जाने का उल्लेख करते है।
- मथुरा के अभिलेखों में सुनारों, लोहारों, बुनकरों, टोकरी बुनने वालों, माला बनाने वालों और इत्र बनाने वालों के उल्लेख मिलते है।
शिल्प तथा शिल्पकार -
- पुरास्थलों से मिटटी के बहुत ही पतले सुन्दर और काले चमकीले पात्र मिले है।
- उत्तर में वाराणसी और दक्षिण में मदुरै कपड़ों के उत्पादन के बहुत महत्वपूर्ण केंद्र थे।
- यहाँ स्त्री-पुरुष दोनों ही काम करते थे।
- शिल्पकार तथा व्यापारी अपने-अपने संघ बनाने लगे थे, जिन्हे श्रेणी कहते थे।
- शिल्पकारों की श्रेणियों का काम प्रशिक्षण देना, कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा तैयार माल का वितरण करना था।
- व्यापारियों की श्रेणियाँ व्यापार का संचालन कराती थी तथा बैंको के रूप में काम करती थी, जहाँ लोग पैसे जमा रखते थे।
अरिकामेडु ( वर्तमान पुडुचेरी )
- लगभग 2200 से 1900 साल पहले अरिकामेडु एक पत्तन था।
- यहाँ ईंटों से बना एक ढाँचा मिला है जो संभवतः गोदाम रहा होगा।
- यहाँ भूमध्य सागरीय क्षेत्र के एम्फोरा जैसे पात्र तथा एरेटाईन ( इटली का शहर ) जैसे मुहर लगे लाल-चमकदार बर्तन भी मिले है।
- यहाँ रोमन लैम्प, सीसे के बर्तन तथा रत्न भी मिले है, सीसे तथा अर्ध-बहुमूल्य पत्थरो से मनके बनाने के पर्याप्त साक्ष्य मिले है।
- अरिकामेडु में छोटे-छोटे कुण्ड मिले है, जो संभवतः कपड़े की रंगाई के पात्र रहे होंगे।
अन्यत्र -रोम --
- यह यूरोप , उत्तरी-अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया तक फैला साम्राज्य था।
- महत्वपूर्ण शासकों में से एक ऑगस्टस ने करीब 2000 साल पहले शासन किया था।
- ऑगस्टस ने रोम को संगमरमर का बनाया बड़े-बड़े रंगमण्डल ( एम्पीथियटर ) तथा स्नानागार बनवाए।
कुछ महत्वपूर्ण तिथियाँ -
- उपमहाद्वीप में लोहे के प्रयोग की शुरुआत ( करीब 3000 साल पहले )
- लोहे के प्रयोग में बढ़ोत्तरी, नगर, आहत सिक्के ( करीब 2500 साल पहले )
- संगम साहित्य की रचना की शुरुआत ( करीब 2300 साल पहले )
- अरिकामेडु का पत्तन (करीब 2200 तथा 1900 साल पहले )
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